विचार
नमस्कार ! दुख की बात है की लडको तथा लड़कियों
में समानता होने का कहकर तो लड़कियों को बहोत
अधिक प्रोत्साहित किया जाता है। तथा लडको को फिर
नजरंदाज किया जाता है अगर समानता की बात की जा रही हो तो सही मायनो में समानता रखनी भी चाइए। इस तरह की मानसिकता की वजह से दो विचारधाराएं समाज में बन चुकी है। एक जो लड़कियों को कुछ समझते ही नही और एक जो केवल लड़कियों के पक्ष में ही दिखते है फिर वो सही हो या गलत अगर कोई विवाद है तो समानता से न्याय होना चाहिए न की यह कहकर की लड़की है या महिला है। केवल इस मानसिकता की वजह से
अगर किसी निर्दोष की जान चली जाए तो कैसी समानता रखते है आप । यहा लड़कियों से भी एक बात कहना
चाहता हु की आप समानता रखना चाहते है या लड़कियों के लिए सहानुभूति और सहानुभूति कभी भी समानता नहीं
रहने दे सकती। हा सच है की समाज में बाहोत सी कुरितीया रही है पर वे सभी आज के समय में खतम हो चुकी है। इसलिए हमे भी आज के समय के अनुसार अपनी
मानसिकता बनानी चाहिए समानता केवल किसी कार्य विषेश या मानसिकता नही विचारो में भी होनी चाहिए। हमारे पुराने समय में पुरुष प्रधान मानसिकता इस लिए विकसित हुई थी क्योंकि लडको के ऊपर जिमेदारिया घर
परिवार का चालक कहकर प्रस्तुत किया इस लिए उन्हें प्राथमिकता दी गई पर अगर इस तरह से तो अभी भी यही मानसिकता है की लडको के समझदार होने से पहले ही ये मानसिकता बना दी जाती है। तुम पर ये जिमेदारी है । क्या आज के समय तक भी लोगो के विचार ऐसे है की लड़किया जीवन भर घर का विकास वा चालक का जीवन जीएं उन्हें दूसरों के घर सम्हालने का ही कहा जाता है। इस मानसिकता की वजह से लड़कियो का कार्य तय है की पति के घर में उसे कया करना है । लेकिन लडको को जीवन की हर मुस्किलो की जिम्मेदारी लेकर चलना है। लड़कियो के विचार इस तरह के
बन गए है की वे कुछ भी कहकर संबोधित कर देती है। हाल
की एक घटना है एक युवक एक लड़की को पसंद करता था
और उसका इजहार करने वो उसके पास गया परन्तु लड़की
ने सबके सामने ले जाकर उसे जलील किया यह कहकर की अपनी मां बहन को इजहार कर क्या यह कहना उचित है। अगर तुम्हे वो पसंद नही था। तो न कहने से भी हो जाता
यहां इस तरह कहने की आवश्यकता थी? क्या आज के समय में एक इजहार तक आप एक सही मानसिकता से
नही देख सकते इससे उस लड़के के संस्कार , माता तक
को गलत मान लिया जाता है। इसमें उस लड़की की कोई
गलती नही समाज में विचारधारा ही ऐसी बना दी गई है लड़कियो के दिमाग में की उन्हें लड़के केवल बुरे ही दिखते है। और बात समानता की होती है । केवल एक विचारधारा से उस लड़के को आत्महत्या करने पर विवश कर दिया जाता है। लड़किया लडको वा पति को अपना दास बनकर रखना चाहती है कई बार वे बाहरी लोगो के सामने भी पति की बुराई कर देती है। किंतु यह उनकी समझदारी नही बेंकूफी ही होती है क्योंकि वे भूल जाती है । की वह भी अर्धांगी है। अगर पति को दास बनकर रखेंगी तो वह भी दासी ही कहलाएंगी और जो पति को उच्च रखती है । वह रानी कहलाती है। यही आधुनिकता का कटु सत्य है की दासी बनने वाली सोच की अधिकता है।अब अगर हम आज के लड़कियो की बात करे तो
तो उनके विचारधारा किस तरह की है उन्हे मॉडर्न कपड़े पहने है दिखावे के लिए और किसी टोक पर यह कहा जाता
की समानता नही है। वे बाहरी समाज के वस्त्र पहन कर यह चाहती है की उन्हें पवित्र कमेंट भी मिले क्या वे जिस समाज का वह वस्त्र पहन रही है उस समाज में भी सुद्ध भारतीय पवित्र कमेंट मिलते है। जैसा ढंग वैसा व्यंग
और ये कैसी मानसिकता है की अगर कोई लड़का किसी लड़की को इजहार कर दे तो उससे कहा जाता है की अपनी
मां बहन को इजहार करे इससे क्या व्यक्त करना चाहते है। सबका अलग स्थान होता है।
मेरे विचार यह है की लडको को ही अपनी विचारधारा परिवर्तित करनी चाहिए किसी लड़की को उसके वस्त्र के लिए न तो तारीफ करे न बुराई
अगर लड़की कहे कि तारीफ करो जो की वो हमेशा चाहती है तो कहो कि तुमसे अच्छी मेरी मां के वस्त्र है।
किसी लड़की को पसंद ही न करे अपने विचार बदले अपने जीवन की जरूरतों पर ही ध्यान रखे लडको को तो बाहोत कुछ करना होता है। इन लड़कियो को तभी सत्य का एहसास होगा
समय के अनुसार लडको को अब लड़कियो पर ध्यान न रखकर अपने भविष्य पर रखना चाहिए क्योंकि लडको को
हमेशा से ही एक जिम्मेदारी वा अपने घर परिवार के लिए
उत्तरदाई कह दिया जाता है। जबकि लड़कियो को इन चीजो का उत्तरदाई नही कहा जाता ।
मत करो किसी को इजहार अगर लड़की कहे तो कह दो मैं
अपनी मां और बहन को ही प्यार करता हू और किसी लड़की को नही ।
अगर इस तरह की मानसिकता बन जाए तो बहोती सी समस्याएं ठीक हो जाएंगी लडको को अपना भविष्य बनाना
चाहिए लड़किया खुद आपको इजहार करेंगी अगर यह मानसिकता बन जाए ।
अगर ऐसा 5-8 वर्ष में हो जाए तो फिर सभी लड़के सफल
वा एक अच्छी जीवन साथी होगी क्योंकि तब लडको के पास यह अधिकार आ जाएगा की कोन सा जीवनसाथी हमे चाहिए । क्योंकि तब आपके पास प्रस्ताव आयेंगे क्योंकि लड़के प्रस्ताव नही करेंगे।
तथा लड़कियों को समझ आ जाएगा की लड़कियो को लडको के योग्य होना होगा न की लडको को।
ध्यान देने योग्य:
यह विचार आज के समय में चल रही
विचारधारा को निर्देशित करते हुए रखा गया है।
समानता कभी सहानुभूति से नही बनाई जाती।
अब वह पुराना कुरीतियो वाला समाज नही है तो लड़कियो को ये तर्क नही देना चाहिए की वे पीड़ित है।
अतः सच ये है की लड़के ही लड़कियो को ज्यादा तवज्जो दे देते है जिस वजह से इनके स्वभाव वा विचार उचित नही रहे अगर इसका विपरीत किया जाए तो वह स्वयं ही उचित विचारधारा रकेंगी ।
यह विचार आज के समय अनुसार व्यक्त किए गए है जिससे सामान्य वर्ग में इसे सही प्रकार समझे जा सके। इसलिए सब्दो की त्रुटि यो वा व्यक्त करने के तरीके को अनावश्यक ही कटु न समझे।
******* आसा है विचारो के वव्यक्तिकरण को समय के अनुसार अनुवाद करके प्रस्तुत करने का यह प्रयास सबको
पसंद आया है।
##धन्यवाद
लेखक:-
बी.के राजपूत
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