विचार
नमस्कार ! दुख की बात है की लडको तथा लड़कियों में समानता होने का कहकर तो लड़कियों को बहोत अधिक प्रोत्साहित किया जाता है। तथा लडको को फिर नजरंदाज किया जाता है अगर समानता की बात की जा रही हो तो सही मायनो में समानता रखनी भी चाइए। इस तरह की मानसिकता की वजह से दो विचारधाराएं समाज में बन चुकी है। एक जो लड़कियों को कुछ समझते ही नही और एक जो केवल लड़कियों के पक्ष में ही दिखते है फिर वो सही हो या गलत अगर कोई विवाद है तो समानता से न्याय होना चाहिए न की यह कहकर की लड़की है या महिला है। केवल इस मानसिकता की वजह से अगर किसी निर्दोष की जान चली जाए तो कैसी समानता रखते है आप । यहा लड़कियों से भी एक बात कहना चाहता हु की आप समानता रखना चाहते है या लड़कियों के लिए सहानुभूति और सहानुभूति कभी भी समानता नहीं रहने दे सकती। हा सच है की समाज में बाहोत सी कुरितीया रही है पर वे सभी आज के समय में खतम हो चुकी है। इसलिए हमे भी आज के समय के अनुसार अपनी मानसिकता बनानी चाहिए समानता केवल किसी कार्य विषेश या मानसिकता नही विचारो में ...